Thursday, October 14, 2010

अंधविश्वास

पहले समय मे कहते थे कि अगर किसी तक कोई खबर पहुचानी है तो टेलिफोन ,टेलिविजन एक माध्यम है या फिर किसी महिला को बता दो तो खबर तुरंत पहुच जाएगी या फिर उससे भी तेज चाहिए तो उस महिला को यह कह देना कि किसी को नही बताना है फिर उस खबर की रफ्तार देखने वाली होगी. पर लगता है ये बात भी बहुत पुरानी हो गई है आज तो नेट का जमाना है. नेट पर लिखते की... पल भर मे दुनिया के सामने होता है.यहाँ तक की मोबाईल पर मैसेज करने का चलन भी बहुत बढ गया है. बेशक आज हम अपनी आवाज दूसरो तक पहुचाने मे किसी से कम नही है पर हैरानी की बात तो यह है कि हम अपनी अंधविश्वास की बेडियो से भी बाहर नही निकले है जैसाकि आजकल बहुत से मैसेज मे लिखा होता है कि देवी माँ आपकी रक्षा करेगी अगर आप इस संदेश को 10 या 15 लोगो तक भेजेगे तो आपकी तरक्की हो जाएगी वगैरहा वगैरहा ... किसी समय मे जो काम पोस्ट्कार्ड किया करते थे आज एक क्ल्कि मे हो जाते है ऐसे मे मन मे दुविधा ही हो जाती है कि क्या मैसेज डिलीट कर दिया जाए या फोरवर्ड कर दिया जाए .... सच हम चाहे कितनी भी तरक्की कर ले पर अपनी आदत को नही छोड सकते ....

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